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रंगों की प्रकाशमय बाजीगरी

शब्दों की जादूगरी हो या लाल, हरे, नीले, पीले... रंगों के संतुलित समायोजन से आसपास की भागती जिंदगी, प्रकृति ही नहीं, बल्कि सपनों से लेकर कल्पना तक के संसार को कैनवस पर उतारने की बाजीगरी, दोनों में समान दखल रखने वाले व्यक्तित्व का नाम है प्रकाश बाल जोशी । मुंबई, जो कभी बम्बई थी। इसी बम्बई की बेतहाशा भीड़ में 1976 में एक और नाम प्रकाशजी का जुड़ गया। शुरुआत उन्होंने पत्रकारिता से की, फिर दुनिया को देखने-समझने का उनका अपना अलग नजरिया उन्हें साहित्य रचना के बाद ब्रश-इंक जैसे माध्यमों की ओर खींच ले गया और उन्होंने कागज-कैनवास को जीवंत कर दिया। आज ‛प्रकाश बाल जोशी’ अन्तर्राष्ट्रीय मंच पर एब्सट्रेक्ट आर्ट का चिरपरिचित नाम है। देश सहित विदेश के दर्जनों शहर में सामूहिक-एकल प्रदर्शनी लगा चुके और कई पुरस्कारों से सम्मानित प्रकाश जोशी इन दिनों नीले (ब्लू) रंग की आध्यात्मिकता को कैनवास पर उतारने के प्रयास में जुटे हैं। पेंटिग उनके लिए सिर्फ एक कृति नहीं है, बल्कि इसके जरिए वे अपनी गहरी दार्शनिक समझ को विभिन्न रंगों की मदद से आकार देते हैं। नीले रंग के आध्यात्मिकता पर आधारित प्रकाशजी की कला प्रदर्शन...

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